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“अब अंतिम छोर तक पहुंचेगा विकास”: 135 ग्राम पंचायतों में गूंज रहा जनजातीय गरिमा उत्सव, गांव-गांव पहुंच रहा प्रशासन

“अब अंतिम छोर तक पहुंचेगा विकास”: 135 ग्राम पंचायतों में गूंज रहा जनजातीय गरिमा उत्सव, गांव-गांव पहुंच रहा प्रशासन

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 18 से 25 मई तक जनभागीदारी अभियान, स्वास्थ्य, पोषण, जनसुनवाई और योजनाओं के सेचुरेशन पर बड़ा फोकस

 

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गौरेला पेंड्रा मरवाही, 18 मई 2026।भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय तथा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास department नवा रायपुर के निर्देशानुसार गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में 18 मई से 25 मई 2026 तक “जनजातीय गरिमा उत्सव एवं जन भागीदारी अभियान” का आयोजन किया जा रहा है। “जन भागीदारी सबसे दूर, सबसे पहले” थीम पर चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत जिले की चयनित 135 ग्राम पंचायतों और 169 ग्रामों में “धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान” अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

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आदिम जाति विकास विभाग द्वारा संचालित इस अभियान का उद्देश्य दूरस्थ वनांचल और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों तक शासन की योजनाओं को सीधे पहुंचाना, जमीनी स्तर पर जनभागीदारी बढ़ाना और वर्षों से वंचित हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ना है।

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जिले में शुरू हुए इस अभियान को लेकर प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। इस बार कार्यक्रम को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित न रखकर ग्राम पंचायत स्तर तक ले जाया गया है, जहां विभिन्न विभागों की संयुक्त टीमें गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही हैं और मौके पर समाधान का प्रयास कर रही हैं।

हर ग्राम पंचायत में शिविर, घर-घर पहुंचेगी योजनाओं की जानकारी

अभियान के तहत चयनित ग्राम पंचायतों में धरती आबा जनजातीय गरिमा उत्सव आयोजित किया जा रहा है। गांवों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां ग्रामीणों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। पात्र हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, छात्रवृत्ति, वनाधिकार पट्टा, प्रधानमंत्री आवास योजना, श्रम पंजीयन, बैंकिंग सेवाएं और अन्य फ्लैगशिप योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी शिविरों के माध्यम से पूरी की जा रही है।

प्रशासन का विशेष फोकस उन परिवारों पर है जो वर्षों से योजनाओं से वंचित हैं या जिन्हें अब तक शासन की सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाया है। इसके लिए ग्राम स्तर पर सर्वे और हितग्राही चिन्हांकन की प्रक्रिया भी चलाई जा रही है।

जनभागीदारी पर जोर, गांवों में बढ़ाई जा रही सीधी सहभागिता

अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल सरकारी अमला ही नहीं, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, ग्राम संस्थाओं और ग्रामीणों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। प्रशासन का मानना है कि जब तक गांव के लोग स्वयं योजनाओं और विकास कार्यों में सहभागी नहीं बनेंगे, तब तक वास्तविक बदलाव संभव नहीं है। यही कारण है कि ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम, बैठकें और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

जमीनी संपर्क और सेवा संतृप्ति पर विशेष फोकस

अभियान के दौरान जमीनी संपर्क और सेवा संतृप्ति को प्राथमिकता दी गई है। कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत निर्मित आदि सेवा केंद्रों में जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जहां ग्रामीणों से प्राप्त शिकायतों को सूचीबद्ध कर उनका निराकरण किया जा रहा है। बिजली, पानी, सड़क, राशन, वनाधिकार, राजस्व, पेंशन और अन्य मूलभूत समस्याओं को लेकर ग्रामीण सीधे अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं। प्रशासन ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शिकायतों का निराकरण केवल कागजों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुनिश्चित किया जाए।

विशेष पिछड़ी जनजातियों तक पहुंचाने का प्रयास

अभियान के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों सहित अन्य जनजातीय हितग्राहियों तक शासन की फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए ग्राम और क्लस्टर स्तर पर विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। चयनित ग्रामों में क्लस्टरवार शिविरों के माध्यम से सेवाओं का सेचुरेशन पूर्ण करने की कार्ययोजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र हितग्राही सरकारी योजनाओं से वंचित न रह जाए।

स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं पर प्रशासन का बड़ा फोकस

जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौतियों को देखते हुए स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण, पोषण परामर्श और एनीमिया जांच की जा रही है। कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग भी सक्रिय रूप से अभियान में शामिल है। ग्रामीणों को स्वच्छता, संतुलित आहार और स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

धरती आबा के संदेश के साथ पर्यावरण संरक्षण अभियान

भगवान बिरसा मुंडा “धरती आबा” की प्रेरणा से संचालित इस अभियान में पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया गया है। ग्राम पंचायतों में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और ग्रामीणों को जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा का संदेश दिया जा रहा है। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सार्वजनिक स्थलों में पौधरोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

आदिवासी विकास विभाग  ने बताया कि,

“धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का व्यापक प्रयास है। जिले के दूरस्थ वनांचल, पहाड़ी और पहुंचविहीन ग्राम पंचायतों में रहने वाले जनजातीय परिवारों तक शासन की योजनाओं और मूलभूत सेवाओं को सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है।

18 मई से 25 मई तक आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव के दौरान जिले की चयनित ग्राम पंचायतों और ग्रामों में स्वास्थ्य शिविर, पोषण कार्यक्रम, जनजागरूकता अभियान, जन सुनवाई, वृक्षारोपण और विभिन्न शासकीय योजनाओं के लाभ वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। हमारा प्रयास केवल योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि पात्र हितग्राहियों को मौके पर योजनाओं से जोड़ना और उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना है।”

उन्होंने कहा कि कई दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी ऐसे परिवार हैं जिन्हें योजनाओं की जानकारी तक नहीं मिल पाती। इसी स्थिति को बदलने के लिए प्रशासनिक अमला सीधे गांवों तक पहुंच रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि ग्राम पंचायत स्तर पर सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें और पात्र हितग्राहियों को मौके पर योजनाओं से जोड़ने की कार्रवाई करें।

सहायक आयुक्त ने बताया कि अभियान के दौरान विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तथा अन्य जरूरतमंद परिवारों की पहचान कर उन्हें शासन की फ्लैगशिप योजनाओं से जोड़ा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांवों में स्वास्थ्य परीक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियां संचालित करेगा। उन्होंने कहा कि ग्राम और क्लस्टर स्तर पर लगाए जा रहे शिविरों में आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, छात्रवृत्ति, वनाधिकार पट्टा, आधार अपडेट, बैंकिंग सेवाएं और अन्य योजनाओं से संबंधित समस्याओं का निराकरण भी किया जाएगा।

सहायक आयुक्त ने आगे कहा कि “जन भागीदारी सबसे दूर, सबसे पहले” थीम के अनुरूप इस अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्राम पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और ग्रामीण समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि यह केवल सरकारी आयोजन न बनकर जनआंदोलन का स्वरूप ले सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी विभागों के अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों को ग्राम पंचायत स्तर पर सक्रिय उपस्थिति और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान के दौरान प्राप्त शिकायतों और मांगों की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से किया जा सके और कोई भी पात्र हितग्राही शासन की योजनाओं से वंचित न रहे।

प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती, अब जमीनी असर पर नजर

हालांकि जिले में इससे पहले भी कई सरकारी अभियान चलाए जा चुके हैं, लेकिन दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में आज भी कई परिवार मूलभूत सुविधाओं और योजनाओं से वंचित हैं। ऐसे में “जनजातीय गरिमा उत्सव एवं जन भागीदारी अभियान” प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती और परीक्षा दोनों माना जा रहा है।

यदि यह अभियान वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सफल होता है, तो यह आदिवासी क्षेत्रों में विकास और विश्वास दोनों को मजबूत कर सकता है। लेकिन यदि यह केवल औपचारिक कार्यक्रम बनकर रह गया, तो लोगों की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता है। फिलहाल जिलेभर की ग्राम पंचायतों में शुरू हुए इस अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में नई उम्मीद जरूर जगाई है, जहां पहली बार कई गांवों में अधिकारी सीधे पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनते दिखाई दे रहे हैं।

 

 

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